आत्म स्वरूप

कतरा होके भी दरिया से जंग करता हूँ
मुझे बचाना समंदर की जिम्मेदारी है,

दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत
ये चराग कई आँधियों पे भारी है।

ज्ञान उद्यम सेवा

रुसेन कुमार मिरी

माता: मानकी देवी – पिता: पंचराम
जन्म तिथिः 11 जनवरी 1977
जन्म स्थल: ग्राम – परसाडीह, तहसील – बिलाईगढ़, जिला – सारंगढ़ – बिलाईगढ़, पिन- 493338, छत्तीसगढ़, भारत
जातिः भारतीय
नागरिकताः भारतीयता

शिक्षा

  • पी.एचडी. स्कालर (वर्तमान)
  • एमबीए – मार्केटिंग
  • एमए (हिंदी)
  • बीएससी (गणित)

विशेषज्ञता के क्षेत्र

  • लेखन
  • लीडरशिप
  • प्रबंधन
  • पत्रकारिता
  • जनसम्पर्क
  • ब्रांड मैनेजमेंट
  • कम्युनिकेशंस
  • ट्रेनिंग एंड डेव्लपमेंट

आत्म रुचिः संगीत, लेखन, सेवा, आत्म सृजन

आत्म प्रवृत्तिः जिज्ञासु, खोजी, उत्साही

भाषा ज्ञानः छत्तीसगढ़ी, हिंदी, अंग्रेजी

आत्म सुख

लोगों से मिलना, विविध संस्कृति को अनुभूत करना एवं भारत दर्शन करना।

आत्म संकल्प

सामाजिक एवं राजनीतिक कर्तव्यों के निर्वाह करने समय को मूल्यवान संपदा स्वीकार करते हुए निम्न संकल्प स्वीकार करता हूँः

सभी प्रकार के व्यसन, नशापान आदि से स्वयं को दूर रखूँगा।

किसी प्रकार के उपहार आदि की वस्तुएँ ग्रहण नहीं करूँगा।

व्यक्तिगत विकास एवं पारिवारिक कर्तव्यों के निर्वाह करने के अतिरिक्त धन-संपत्ति संग्रहित, विकसित संग्रहित नहीं करूँगा।

प्रसिद्धि आदि की कामनापूर्ति हेतु किसी प्रकार के पुरस्कार-सम्मान ग्रहण नहीं करूँगा।

किसी प्रकार के विध्वंसकारी गतिविधियों में संलिप्त नहीं होउँगा।

स्वयं को सेवा, लेखन, विचारशीलता तथा कर्तव्य पालन के कार्य में प्रेरित रखूँगा।

आत्म शक्ति

प्रेम, विनम्रता और सद्भाव

आत्म उत्थान

दाद-ए-सुखन न मिलने से, लुफ़्त-ए-अश्यार कम नहीं होते। – बहादुर शाह जफर

(अर्थ – कविता की प्रशंसा न मिलने से, कविता की रचना करने का आनंद कम नहीं होता है।)

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मुझे आपमें इतना भरोसा रहने दीजिए कि मेरे सर्वाधिक स्याह समयों में मैं स्वयं को आपकी बांहों में डाल सकूँ। – बाइबिल

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दिल में जो है वही ज़बान पे है, और कोई हममें खास बात नहीं। – अज्ञात

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